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शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

उड़ान ...श्वेता सिन्हा

चलो बाँध स्वप्नों की गठरी

रात का हम अवसान करें

नन्हें पंख पसार के नभ में

फिर से एक नई उड़ान भरें


बूँद-बूँद को जोड़े बादल

धरा की प्यास बुझाता है

बंजर आस हरी हो जाये

सूखे बिचड़ों में जान भरें


काट के बंधन पिंजरों के

पलट कटोरे स्वर्ण भरे

उन्मुक्त गगन में छा जाये

कलरव कानन में गान भरें


चोंच में मोती भरे सजाये

अंबर के विस्तृत आँगन में

ध्रुवतारा हम भी बन जाये

मनु जीवन में सम्मान भरें


जीवन की निष्ठुरता से लड़

ऋतुओं की मनमानी से टूटे

चलो बटोरकर तिनकों को

फिर से एक नई उड़ान भरें

-श्वेता सिन्हा

मूल रचना