नववर्ष की दिली शुभकामनाएँ
"स्पेन"
टमाटर की स्पेन में खेलते हैं होली
जन-जन खुशहाली की बोलते बोली।
लाखों टन होता टमाटर बरबाद
अट्ठाईस अगस्त को मनाते त्यौहार।।
"रावण"
धरा-गगन व राहू-केतु, शनि जिसके रहा अधीन।
इन्द्र जाल व तंत्र-मन्त्र सम्मोहन था पराधीन।।
अस्त्र-शस्त्र औ' विमान माया थे उसके अधीन।
फिर भी शाप से शापित वह जबकि रहा कुलीन।।
"पी रहा"
विश्व को मैं समेटे जी रहा,
चीथड़े ग़रीबी के सी रहा।
तन-वदन है कर रहा मनमानियां
ख़ुशनुमा मौसम है थोड़ा पी रहा।।
"प्रकृति "
जीने की कला प्रकृति हमें सिखाती।
जीवन के आंगन में है बिठाती।।
भू पर नीचे जल बरसाती।
चार युगों का सफर कराती।।
ऋषियों के संसार बसाती।
धरा मयंक गगन में सजाती।।
जीवन काल का मरम -सत्य
सुबह-सुबह हमें बताती।
गौरव गाथा हमें पढ़ाने,
भोर में ही हमें जगाती।
चलने वाले
चलने वाले चल देते हैं
चलकर भी कुछ दे देते हैं।
जीवन का वह राज-साज
जिसे करते हैं लोग याद |
-सुखमंगल सिंह
