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शनिवार, 30 दिसंबर 2017

इंसान को इंसान बनाया जाए....गोपालदास "नीरज"

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए।
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए। 

जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर
फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए। 

आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी
कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए। 

प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए
हर अँधेरे को उजाले में बुलाया जाए। 

मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा
मैं रहूँ भूखा तो तुझसे भी न खाया जाए। 

जिस्म दो होके भी दिल एक हों अपने ऐसे
मेरा आँसू तेरी पलकों से उठाया जाए। 

गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रूबाई है दुखी
ऐसे माहौल में ‘नीरज’ को बुलाया जाए।
-गोपालदास "नीरज"

शनिवार, 16 दिसंबर 2017

बच्चों द्वारा लिखे गए हाईकू

1
दोस्तों के साथ
खेलता युवा हुआ
मन का बच्चा ।   
- भजन पटेल - 11वीं
2
मरे ना मारे
काटे न कटे कभी
यही है दोस्ती ।     
- विष्णु पटवा – 11 वीं
3
यारों की यारी
मुसीबत है भारी
लगी बीमारी ।     
- लोकेन्द्र जगत – 11वीं
4
दोस्ती हमारी
अंगूर गुच्छे जैसी
खट्टी – मीठी सी ।    
- अर्जुन सेठ - १२ वीं
5
दोस्ती न्यारी है
लड़े – खेले हैं साथ
अब चैटिंग ।  
- सुषेन भोई - 11 वीं
6
दोस्ती की बातें
यादों संग दिखाती
राहें नवेली ।  
- देवेन्द्र पोर्ते – 12 वीं
7
पापा का डर
फिर भी निभा गए
दोस्ती छिप के ।   
- प्रदीप चौहान – 11 वीं
-0-
कुछ अन्य विषयों पर हाइकु
1
तवे पे रोटी
भूख लगे सिंकती
पेट की आग ।     
- जीशु कनर  - 11वीं
2
अच्छी खबर
दूर तक फैलती
शब्दों की रैली ।    
- भजन निषाद – 12 वीं
3
सपेरा आया
डर दिखा लूटा है
छोटा बाज़ार ।      
- कमल राज पोर्ते – 12वीं
4
विलुप्त होंगे
कल प्रदूषणों से
आज जो हरे ।      
- खीर सागर साव – 12 वीं
5
हवा मुझको
उड़ा ले जहाँ से
मुझे मिला दे ।     
- शरद कुमार – 12 वीं